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जाने नहीं दूँगा!

चलने से पहले नंबर दिया तुमने कहा - चालू हो जाएगा न्यूयार्क पहुँचने पर. मैं सोचता रह गया - क्यों? कई बरस हुए तुम्हें गए हुए - तुम भी जानती हो, और रहा नहीं कुछ बात करने को, तब से. याद होगा तुम्हें एक मेल आईड़ी बनाया था सिर्फ मेरे लिए - nouvelle पर कुछ रहा नहीं अब तुम्हें बताने को सिवाय इसके कि तुम जा चुकी हो, पर यह तो तुम भी जानती हो, शायद मैं कुछ ज्यादा जानता हूँ - तो क्यों न तुम्हें बताऊँ? बड़ा मुश्किल है यह मैं कोई कवि भी नहीं. प्रो. सोंधी ने कहा था एक बार - जब कोई देख नहीं रहा होता, या जब मैं ऐसा सोचता हूँ, काँच -सा बन जाता है मेरा चेहरा - और सारी उथल-पुथल साफ़ दीख पड़ती है, मुझे लगता है - बगूलों जैसी, बगूले - अलग अलग रंग के एक दूसरे से टकराते. उतारना चाहता हूँ उन्हें एक कागज़ पर, एक चिट्ठी - ग्लिफों से भरी जो बिना शब्दों के कह दे - तुम जा चुकी हो.

"see everything before being seen"

दुर्घटना- कोई कट गया दो हिस्सों में अंतड़ियां बाहर बिखरी हों ट्रक के टायर के नीचे, तो रुक कर देखता हूँ कुछ छूट ना जाए - सब काम आएगा कहीं ना कहीं. छद्म शांत - जैसे रोज़ ही ऐसा कुछ होता हो, बड़ा कुछ जाना-समझा है यों और गलत समझा भी गया हूँ.

पुनर्जन्म

प्रिय अ, न जाने कैसे लिख सका Roberto Bolano The Ghost of Edna Lieberman बिना मुझसे बतियाए. जाने कैसे चुरा लिए मेरे सीने से भाव, भर दिए उस कविता में, और दे दिया एक नया नाम तुम्हें.

बयान / A Hole

उसका पेट हिला ऊपर नीचे और शुरू हो गई  उसकी बकवास. पिघली रबड़-जैसी गाढ़ी आवाज़ आवाज़ जिसे लगभग सूंघा जा सके आवाज़ जो कभी सर्कस का हिस्सा थी आज संजीदा मंच से बोल रही है.
पंख,  चमड़े के बने, विशालकाय. बस पंख ही दिख रहे थे धुंए में छुपे उस राक्षस के. हलकी हवा चली तो पंख और शरीर के बीच कुछ फेफड़ों जैसी थैलियाँ दिखीं - साँस ले रही थीं ये, धुआं उगल रही थीं. उसे घेरे खड़ी भीड़ अपनी आँखें दे रही थी उसे, बड़ी गंभीर मुद्रा में - लगभग कराहते  हुए - वह निगल रहा था एक बार में एक आँख. हर आँख निगलते ही उसकी शक्तियां बढ़ रही थीं, काश मैं कह सकता - वह बढ़ रहा था, पर उसका आकार उसकी इच्छा का गुलाम था. कानों में मेरे रुदन गूँज रहा था बधियाकरण का -  एनेस्थेटिस्ट के जन्म से पहले के. पर उस भीड़ को कुछ और ही सुन रहा था - न मालूम क्या.