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अक्तूबर, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रिसता

धीमे धीमे बारिश का पानी भर गया छत पर. पता ही नहीं चला कब सीलन भर आई दीवार पर बसी दरारों में. हम सोचते रहे सब ठीक होने लगेगा अब, और अचानक ढह गई छत.