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कुछ कदम सूखे पत्तों पर

जाने कहाँ खो गई है ढूँढ ढूँढ कर थक गया, वह छोटी सी बोतल संभाल कर रखे थे जिसमें दो बूँद आंसूं. आज फुँक रहा हूँ भीतर कहीं साँसों में भर गया है धुआं, जल रही है आँखें चुभ रहा है कुछ, पर वह बोतल... उसी के पास एक नीली सी बोतल में कुछ सपने भी छुपे हैं कई जागती रातों के, कई धुंधली सुबहों के, तरल सपने जो लाख कहने पर भी बदले ही नहीं. बंजर-सी हो गई थी, आखिरी बार जब दिखी थी, मनी प्लांट तक नहीं उगता उसमें. भर गया है धुआं.

Cut up 2

Well, i think this has turned out more horrible than the first one, but somehow i liked it here and there: अपने हाथ फैलाए, क्रॉस पर टिकाए लाचार कबूतर सा प्रेम. मेरी परछाई में दुबका-दुबका सा प्रेम. तागों सा प्रेम. तुम्हारी बांहों में से छीलना शुरू करना आसान प्रेम तुमसे. ताजे ज़ख्म सा लाल सिमटी सिकुडी चादर सा प्रेम. हमारी गंध सा प्रेम. शब्दों की जाएगा.सा प्रेम. हाँ, पर ज्यादा ना गर्माहट में बसा प्रेम.

A Good Influence

ताजे ज़ख्म सा लाल प्रेम, थोडा घुमा कर, थोडा और दबाओ- अभी और गहरा उतरेगा. हाँ, और रिसेगा खून जब बाहर खींचोगे, वहीँ से छीलना शुरू करना आसान होगा, पका केला छीलने जैसा. अपने हाथ फैलाए, क्रॉस की तरह मदद करूँगा तुम्हरी गुलाबी आँखें फोड़ने में. पर ज्यादा ना रिसने देना वरना स्वाद बिगड़ जाएगा.