पोस्ट

सितंबर, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रतीक्षा

घर भर गया है पारदर्शी शीशियों से, सब खाली है लगभग अदृश्य, अर्थों की प्रतीक्षा में. ... ठीक हैं. यहीं बैठ कर कुछ कांच फोड़ते हैं छन छन छन. कांच के टुकडों पर घूमेंगे थोडा, नीली दीवारों के बीच.