पोस्ट

मार्च, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कभी जन्मती नहीं कविता

वह जो बच जाती है कागज़ पर  वह कविता नहीं है. वह जो उतरती है धीरे धीरे  फिर छानी जाती है - लगातार  काटी जाती, जोड़ी जाती है बार बार  वह जिसमें कविता होने की संभावना है बस वह संभावना ही कविता है वह कविता कभी जन्मती नहीं. 

कन्हैया - एक कट अप

देश अपराध करे और उन्हें ‪‎जनता‬ की खून-पसीने की कमाई इन्हें ‎भारत‬ से नहीं, भारत काटने पर पांच लाख रुपये की ‪बर्बादी‬ की आज़ादी चाहिए। पर मुफ्त की ऐश करते उसकी ‪‎भेड़ें‬ गुंडागर्दी की आजादी 11 लाख रुपये का इनाम है ? है ? यानि ‪‎कन्हैया‬ और और भौंकते रहने की आज़ादी इस आशय को लेकर जगह-जगह हैं आज़ादी को खुदगर्जी द्वारका को गोली मारने वाले को अश्लील और पाखंड को पूजा में आज उत्सव हो गया बाद जो आया उस जीवन और फिर कहता है कि माँग रहे हैं ! हैं ! साधारण चाहिए, ‪‎संविधान‬ से आजादी चाहिए। पूर्वांचल सेना की तरफ से सा एक जन्म अँधेरी कैद मानने वाले हम. वाले हम. जेएनयू के पर सजा न दी जाए का इनाम देने की घोषणा आजादी नहीं है. नहीं है. इन्हें गुंडागर्दी, ‪देशद्रोह‬ का अपराधी, सरकार और हो इतना भौंक रहा है है. है है. पर उस जन्म के में रहते हुए भी भारत हुए, अंतरिम जमानत पर रिहा सजा न मिले यह आजादी में गुण्डागर्दी, विद्रोह, और भारत देशद्रोह के बावजूद ऐश करने दिया जाएगा। कन्हैया की जीभ पलायन के कमजोरी प्रेम को क्या हर किसी को अपराध छात्रसंघ अध्यक्ष एवं देशद्रोही कन्हैया से हम डरते हैं. डरते हैं. डरते यह आज़ादी

कन्हैया

साधारण सा एक जन्म अँधेरी कैद में आज उत्सव हो गया है. पर उस जन्म के बाद जो आया उस जीवन से हम डरते हैं. डरते हैं आज़ादी को खुदगर्जी द्वारका पलायन के कमजोरी प्रेम को अश्लील और पाखंड को पूजा मानने वाले हम.