पोस्ट

अगस्त, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बारिश के बाद

कल रात बारिश के बाद पत्तों से टपकता पानी कुछ कह रहा था, सुना था तुमने? कवियों की सी टोली में भटकेंगे हम दिन दिन बढ़ते कचरे में कविताओं के पुर्जे मिलाते, चलोगी तुम? सडकों पर बने गड्ढों में जमा पानी में कुछ नाव तैराएँगे, चलोगी ना?