एक कविता नई

कागज़ पर उतारकर कोई कविता
हर बार सोचता हूँ क्या नई है यह कविता?
किसी पुरानी कविता
किसी पहले लिखी कविता
कहीं छुपी आदर्श कविता
का संशोधन मात्र तो नहीं यह कविता?

या कहीं शब्दों की यह दीवार
चित्र मांगती ईटों की दीवार
में लगी खूंटी पर टंगने का सपना लिए जन्में चित्र के दीवार
में चुनावाए जाने के लिए खड़ी की गई दीवार
तो नहीं? या कैमरे की आँख से जो दिखती है दीवार

के पार होती कार्रवाई
कहीं उस कार्रवाई
को अँधेरे में घूम घूम कार्रवाई
करते किसी ने अपनी ही कार्रवाई

से प्रेरित हो कविता तो नहीं कह दिया?
कहानी को, आलस में, कविता का नाम तो नहीं दे दिया?
या कविता मनवा दिया

अपने सपनों को ही?
अकड़ में अपनी ही?

कभी जन्मती भी है कविता नई?

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