एड्ना लिएबेर्मन का भूत

[मूल: Roberto Bolano, El Fantasma de Edna Lieberman]

सबसे काली घड़ियों में आती हैं तुमसे मिलने
वे तमाम मुहब्बतें जो खो गई थीं.
पागलखाने तक जाने वाली पगडण्डी
बिछने लगती है जैसे बिछती थीं आँखें
एड्ना लिएबेर्मन की,
बस उसी की आँखें जो
शहरों की छतों से ऊंची उठकर
चमक सकती थीं.
और वे फिर चमक रहीं हैं तुम्हारे लिए,
एड्ना की आँखें,
पीछे उस अग्निवलय के
जो पगडण्डी हुआ करता था,
रातों को तुम जिसकी परिक्रमा करते थे.,
बार बार,
खोज में उसकी या शायद
अपनी परछाईं की
और तुम जागते हो, शांत,
और एड्ना की आँखें
हैं वहीँ
चंद्रमा और अग्निवलय के बीच
अपने मनपसंद मेक्सिकन कवियों को पढ़ती.
और गिलबेर्तो ओवेन?
पढ़ा है उसे तुमने?
बिना आवाज़ ही तुम्हारे होंठ कह उठते हैं,
कह उठती हैं तुम्हारी साँसें
और तुम्हारा खून जो दौड़ रहा है
प्रकाशस्तंभ के किरणपुंज की तरह.

टिप्पणियाँ

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 09 जुलाई 2016 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!
Luv ने कहा…
thank you.

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