परिरोध

एक परी थी
हाथ नहीं थे उसके, पर थे
हलकी थी, हड्डियां खोखली थीं
पर उड़ान, उड़ान नहीं थी
पंख फैलाए, तैरती हवा पर
हर पल थोडा नीचे उतरती
उतरती जाती, उतर जाती.

परी थी, पर आधी
मानस गंध थी उसमें.
एकांत परिरोध.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Fatal Familial Insomnia

सपनों की टोली

तुम बिन, जाऊं कहाँ...