कुतरन

गिफ्ट-व्रैप किए डब्बे में कभी
एक कान मिले तुम्हें,
साफ़, साबुन की गंध लिए
तो पहचान तो जाओगी किसका है?
चौन्कोगी तो नहीं जानकर?
कभी पकी रहती थी कान की लव
तुम्हारे काटने से.

मेरे काटने से नहीं पकी.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Fatal Familial Insomnia

सपनों की टोली

तुम बिन, जाऊं कहाँ...