शांखा

मैच जीत कर चहकते-फुदकते बच्चों सी बूँदें
फ्रेंच विंडो से झांकते हम.
सफ़ेद शंख का कंगन
सब कुछ धुला-धुला.

किसी और कहानी से
धूल भरी लाल आंधी चली आई
बारिश से ठीक पहले.
फिर बरसा काला पानी
जो भी भीगा, कालिख में नहा गया.

टिप्पणियाँ

ST ने कहा…
अच्छी रचना

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