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मई, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
एक आंसूं, एक बादल का टुकड़ा, कुछ धूप, और चंद तारे रखे हैं छोटी-छोटी शीशियों में, तुम्हारी उँगलियों के इंतजार में. यहीं एक कोने में मायूस खड़ा है अधूरा कैनवस.