आप्लावन टैंक - 2

पार्किंग लाट से सटा
वह एक कमरा,
चारों ओर से घूरते
तुम्हारे आत्म चित्र,
सफ़ेद सिगरेट के धुंए में घुली
डिटर्जेंट की गंध,
उस दिन ले आया था
एक बोतल भर धूप वहां -
तिलमिला उठी थीं तुम.

गलत समय चुन लिया था मैंने,
जब लाल आँखों वाले राक्षस
दूर भगा देते हैं निद्रा देवी को,
जब एक तलवार अलग कर देती है
विचारों के गोलार्द्ध को
वस्तुओं के गोलार्द्ध से,
जब दोनों आँखें मिलकर
किनारे तोड़ देती हैं,
पर्दों से ढके तुम्हारे उस कमरे में
फिर न आने दिया कभी.

अ,
इतना तो बता दो
कि अब कैसी गंध है?

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