मोलॉक

लगता था मुझे
एक छाया जीवी
मेरे जरिए
यात्रा कर रहा है,
बातें करता है मुझसे
जुड़ता कभी नहीं
किसी से भी.

पर अब
मैं ही यात्री हूँ
और मैं ही वाहन.
जब से जाना है
आवाजें बंद हो गई हैं,
पर अब भी नहीं है
कोई लगाव.
नहीं जानता अब
कैसे दिखाऊँ
वह नकली भाव
बिना उस आवाज़ के
निर्देशन के.

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