फ्री-विल

सागर में गिरती बूँद,
तपते तवे पर गिरती बूँद,
रेत में गिरती बूँद,
खेत में गिरती बूँद,
सीप में जाती बूँद,
बूँद...
बूँद...
बूँद...
आखिर हैं तो सब बूँद ही!
अपनी-अपनी किस्मत में कैद.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Fatal Familial Insomnia

सपनों की टोली

तुम बिन, जाऊं कहाँ...